Navi Pillay
Who is Navi Pillay: दक्षिण अफ्रीका की मशहूर वकील और जज नवीनेथम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता बताया गया है. उन्हें शांति, मानवाधिकार और इंटरनेशनल कानून को मजबूत करने की कोशिशों के लिए सम्मानित किए जाने की खबर है. साल 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक भारतीय तमिल परिवार में जन्मीं नवी पिल्लै ने रंगभेद के दौर में कई मुश्किलों का सामना किया. इसके बावजूद उन्होंने कानून की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और इंटरनेशनल स्तर पर अहम जिम्मेदारियां निभाईं.
नवी पिल्लै ने साल 1967 में इतिहास रचा, जब वह दक्षिण अफ्रीका के नेटाल प्रांत में वकालत शुरू करने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं. उन्होंने नेल्सन मंडेला समेत रंगभेद का विरोध करने वाले लोगों का बचाव किया और सरकार की ओर से कैदियों पर किए जाने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने रॉबेन आइलैंड की जेल में बंद राजनीतिक कैदियों को कानूनी अधिकार दिलाने के लिए भी संघर्ष किया. रंगभेद खत्म होने के बाद 1995 में नेल्सन मंडेला ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में जज नियुक्त किया, जहां वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं.
रवांडा में यौन हिंसा को लेकर अहम फैसलों में निभाई भूमिका
नवी पिल्लै ने रवांडा के लिए बने इंटरनेशनल आपराधिक न्यायाधिकरण में आठ साल तक काम किया. वह 1999 से 2003 तक इसकी अध्यक्ष भी रहीं. इस दौरान उन्होंने ऐसे अहम फैसलों में भूमिका निभाई, जिनमें यौन हिंसा और बलात्कार को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़ा माना गया. इसके बाद 2003 से 2008 तक उन्होंने इंटरनेशनल आपराधिक न्यायालय की अपील शाखा में जज के तौर पर काम किया.
संयुक्त राष्ट्र में भी संभाली बड़ी जिम्मेदारी
साल 2008 से 2014 तक नवी पिल्लै संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख रहीं. इस दौरान उन्होंने दुनिया भर में लोगों के अधिकारों की रक्षा और अन्याय के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया. उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कथित नरसंहार से जुड़े मामले में इंटरनेशनल न्यायालय में अस्थायी जज के तौर पर भी काम किया. इसके अलावा, उन्होंने कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र की स्थिति की जांच करने वाले संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र आयोग की अध्यक्षता की. उनका पूरा करियर मानवाधिकारों की रक्षा और इंटरनेशनल कानून को मजबूत करने के लिए किए गए कामों के लिए जाना जाता है.